रक्षामंत्री ने पैंगोंग-त्सो झील के पास स्थित फारवर्ड लोकेशन लुकुंग में शुक्रवार को सेना और आईटीबीपी के जवानों को संबोधित किया। उनसे बातचीत के दौरान उन्होंने आईटीबीपी की एलएसी के करीब फारवर्ड लोकेशन डुंगति में बिताई अपनी रात भी याद की। बता दें, राजनाथ सिंह उस समय गृह मंत्री थे।
जब राजनाथ से बोला जवान- जय हिंद साहब, मैं आईटीबीपी से, सुनते ही सिंह को याद आई वो रात
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजनाथ सिंह- अरे वाह, आईटीबीपी के साथ तो मैं रह चुका हूं, डुंगति में रुका था। वहां थे आप उस समय?
आईटीबीपी जवान- जी हां साहब।
राजनाथ सिंह - बहुत ठंड थी।
आईटीबीपी जवान - जी नाइट होल्ड किया था आपने साहब।
राजनाथ सिंह - हां, रात को रुके थे।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सेना पर हमें नाज है। आप लोगों के अंदर एक स्वाभिमान (राष्ट्रीय स्वाभिमान) की भावना है। आप लोग सब कुछ बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन अपने स्वाभिमान पर किसी प्रकार की चोट बर्दाश्त नहीं कर सकते। इसी स्वाभिमान के कारण आप लोग अपनी जान की परवाह किए बिना अपना सब कुछ देश के लिए न्योछावर करने के लिए तैयार हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत को अगर आजादी मिली है तो वह इसी राष्ट्रीय स्वाभिमान के कारण मिली है। चाहे वह चंद्रशेखर आजाद रहे हों, सरदार भगत सिंह रहे हों या अशफाक उल्लाह रहे हों सभी ने इसी राष्ट्रीय स्वाभिमान की भावना के कारण ही हंसते हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया था तब जाकर यह हमारा भारत आजाद हुआ है।
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि यदि अगर आज हम लद्दाख के इस क्षेत्र में खड़े हैं तो आज के दिन मैं कारगिल युद्ध में भारत की सीमाओं की एक-एक इंच जमीन की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की बाजी लगाकर जिन बहादुर सैनिकों ने शहादत दी है उन्हें भी स्मरण एवं नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। क्योंकि कारगिल विजय दिवस भी 26 जुलाई को है।